अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड के लिए कोई फिक्स्ड डिपॉज़िट (FD) या कोलैटरल जमा नहीं करानी होती है। कार्ड की क्रेडिट लिमिट आवेदक की आय, क्रेडिट स्कोर (Credit Score) और मौज़ूदा कितने लोन और क्रेडिट कार्ड बिलों का भुगतान करना है, जैसे विभिन्न कारकों के आधार पर निर्धारित की जाती है। अगर आपके पास पहले से ही एक अच्छा क्रेडिट स्कोर है और आप क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता द्वारा निर्धारित न्यूनतम मासिक सैलरी, किस प्रकार का काम करते हैं, नियोक्ता/ कंपनी प्रोफ़ाइल जैसी योग्यता शर्तों को पूरा करते हैं तो अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लेना अच्छा विकल्प हो सकता है। उपभोक्ता विभिन्न प्रकार के रिवॉर्ड और कैशबैक भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, आप बेस्ट ट्रेवल और एंटरटेनमेंट रिवॉर्ड के साथ- साथ हर ट्रांजेक्शन पर रिवॉर्ड प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आपकी रीपेमेंट हिस्ट्री अच्छी है यानि कि आपने अब तक अपनी लोन ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बिलों का भुगतान समय पर किया है और इसके अलावा आपकी इनकम भी अच्छी- खासी है तो आपको अधिक क्रेडिट लिमिट का लाभ मिल सकता है, जिससे आपके क्रेडिट यूटिलाइज़ेशन रेश्यो में सुधार हो सकता है।
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सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड
सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लेने के लिए कोलैटरल के रूप में FD जमा करना पड़ता है। आजकल लोग सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड अधिक लेते हैं क्योंकि इससे न केवल आपका क्रेडिट स्कोर बनता है बल्कि गिरवी रखी गई FD पर ब्याज भी मिलता रहता है। सिक्योर्ड कार्ड की क्रेडिट लिमिट आपके फिक्स्ड डिपॉज़िट की वैल्यू के आधार पर निर्धारित की जाती है, जो आमतौर पर FD वैल्यू की 80% -100% के बीच होती है। ये कार्ड उन उपभोक्ताओं के लिए सबसे उपयुक्त हैं जो अपने खराब या ज़ीरो क्रेडिट स्कोर, अपर्याप्त आय, जॉब प्रोफाइल या लोकेशन संबंधी बाध्यता के कारण अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
स्टेप अप क्रेडिट कार्ड भारत में सभी जगहों पर जारी किया जाता है जिसके लिए न ही आपका क्रेडिट स्कोर, इनकम/ एंप्लॉयमेंट को चेक किया जाता है और न ही कोई दस्तावेज जमा कराने पड़ते हैं। जो उपभोक्ता अपने खराब/ ज़ीरो क्रेडिट स्कोर या फिर जॉब/एंप्लॉयमेंट प्रोफ़ाइल या लोकेशन संबंधी बाध्यता की वजह से अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड नहीं ले पाते हैं, वे स्टेप अप क्रेडिट कार्ड का लाभ उठा सकते हैं, अपने कार्ड से किए गए खर्च पर रिवार्ड पॉइंट प्राप्त कर सकते हैं और आकर्षक रुपे कार्ड ऑफ़र का लाभ उठा सकते हैं। इसके साथ ही अपने क्रेडिट कार्ड बिलों का समय पर भुगतान कर अपने क्रेडिट स्कोर को बना सकते हैं या उसमें सुधार कर सकते हैं।
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सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने के लाभ
- आप सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड पर FD ब्याज़ प्राप्त सकते हैं
- जिन्होंने आज तक लोन या क्रेडिट कार्ड नहीं लिया है, उनकी क्रेडिट हिस्ट्री बनने में मदद मिलती है
- खराब स्कोर वाले लोगों के क्रेडिट स्कोर में सुधार हो सकता है
- आपकी लिक्विडिटी में बढ़ोतरी होती है और इस प्रकार आप अपनी FD को समय से पहले क्लोज नहीं कर सकती हैं।
सिक्योर्ड बनाम अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड: आपके लिए सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड लेना सही रहेगा या अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड, इसका चयन पूरी तरह से इस पर निर्भर करता है कि आपको किस उद्देश्य के लिए क्रेडिट कार्ड चाहिए, और आप ज्यादा खर्च करते हैं या कम और आपकी क्रेडिट प्रोफाइल कैसी है। जो लोग क्रेडिट स्कोर बनाना चाहते हैं या फिर उसमें सुधार करना चाहते हैं तो उनके लिए सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है, जबकि अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड उन लोगों के लिए अच्छा है जो ज्यादा से ज्यादा रिवॉर्ड प्राप्त करना चाहते हैं। हालांकि, कार्डधारकों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि डिफॉल्ट होने पर या समय पर भुगतान न करने से अनसिक्योर्ड और सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड दोनों के लिए उनका क्रेडिट स्कोर कम हो जाएगा।
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विशेषतायें:
विवरण | सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड | अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड |
न्यूनतम क्रेडिट स्कोर | क्रेडिट स्कोर ज़रूरी नहीं | 750 और इससे अधिक क्रेडिट स्कोर होने से अनसिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने की संभावना अधिक होती है |
जगह | आमतौर पर क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक की शाखाओं के सर्विस एरिया में उपलब्ध होते हैं। | क्रेडिट कार्ड जारी करने वाले बैंक की चुनिंदा शाखाओं में ही प्रदान किया जाता है |
इनकम चेक | इनकम चेक करने की ज़रूरत नहीं | यह कार्ड तभी ऑफर किया जाता है जब आवेदक की आय निर्धारित योग्यता शर्तों के मुताबिक हो |
ऑक्युपेशन चेक | ये चेक नहीं किया जाता कि आप किस प्रकार का काम करते हैं | क्रेडिट असेसमेंट की प्रक्रिया के तहत ये चेक किया जाता है कि आप किस प्रकार का काम करते हैं |
आवेदक की प्रोफाइल चेक | आवेदक की प्रोफाइल को चेक नहीं किया जाता है | क्रेडिट असेसमेंट की प्रक्रिया के तहत आवेदक की प्रोफाइल चेक की जाती है |
कोलैटरल | आवेदक को एफडी अकाउंट खोलना होगा जिसे कोलैटरल के रूप में जमा करना पड़ेगा | कोई कोलैटरल/ सिक्योरिटी जमा कराने की ज़रूरत नहीं है |
क्रेडिट लिमिट | आमतौर पर एफडी की 80%-100% | आवेदक की क्रेडिट प्रोफाइल पर निर्भर करता है |
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